अभी कुछ दिन पहले हल्ला सुना एक फिल्म के बारे में, नाम स्लमडॉग मिलियनेयर (Slumdog Millionaire)। यह एक फिल्म है जो कि एक अंग्रेज़ ने बनाई है कि कैसे एक स्लम में पला बड़ा हुआ लड़का एक “कौन बनेगा करोड़पति” टाइप के कार्यक्रम में जीत की कगार पर पहुँच जाता है और सब उसकी इस उपलब्धि से सन्न रह जाते हैं। जिन लोगों ने फिल्म देख ली उनसे सुनने/पढ़ने में आया कि फिल्म बहुत ही धांसू है, फिल्म ने अवार्ड वगैरह भी जीत लिया!! आने वाले शुक्रवार, 23 जनवरी को यह फिल्म भारत में “स्लमडॉग करोड़पति” के नाम से हिन्दी में रिलीज़ हो रही है। मैं भी सोच रहा था कि शायद मैं भी देख आऊँगा सिनेमा पर क्योंकि मैं भी उन लोगों में हूँ जिन्होंने इंटरनेट से पॉयरेटिड कॉपी डाउनलोड कर नहीं देखी है और सिनेमा में देखने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मैं प्रतीक्षा नहीं कर रहा, मूड हुआ तो देख आएँगे और यदि जानने वालों से खास समीक्षा नहीं मिली तो नहीं देखेंगे, कोई बड़ी बात नहीं है!!
स्लमडॉग करोड़पति और प्रतिभा विहीन अमिताभ बच्चन
On 17, Jan 2009 | 15 Comments | In Mindless Rants, Movies, फ़ालतू बड़बड़, फ़िल्में | By amit
शादी में जाना भी एक आफ़त!!
On 14, Jan 2009 | 12 Comments | In Mindless Rants, फ़ालतू बड़बड़ | By amit
इस बार की परीक्षाओं में आखिरी पर्चा बचा है जो 19 जनवरी को है, तो इसलिए अभी बीच में चार दिन की राहत है, वैसे राहत कहाँ, कहने को ऑफिस से छुट्टी पर हैं लेकिन आज और कल ऑफिस के कुछ महत्वपूर्ण कार्य निपटाने हैं, पन्द्रह दिन से छुट्टी पर हैं तो ऑफिस को जुदाई सहन नहीं हो रही!!
उधर अनूप जी बारात कांड बाँचे तो इधर एक प्रश्न पुनः मुँह उठा सामने आ खड़ा हुआ जिसको मैं पिछले कुछ दिनों से टाल रहा था। फरवरी के आरंभ में मौसेरी बहन की शादी है, प्रश्न है कि क्या पहना जाए! तीन दिन फंक्शन है तो तीन दिन के लिबास पर ध्यान देना है। इधर घरवालों ने और एकाध मित्रगण ने डपट दिया कि हमेशा की तरह कम से कम शादी में मौजी बाबा बनकर मत जाना, थोड़ा सलीके के कपड़े पहन बन-ठन के जाना। कहा गया कि जिसकी शादी है उसका बन-ठन के जाना इतना महत्वपूर्ण न हो लेकिन शादियों में शिरकत करने वाले तुम जैसों का बन-ठन के जाना आवश्यक हो जाता है, कि क्या पता किसी लड़की वाले को तुम पसंद आ जाओ। तौबा!! 😕 और यही अविवाहित लड़कियों को भी झेलना पड़ता होगा!!
On 11, Jan 2009 | 14 Comments | In कतरन | By amit
एयरटेल के 1 mbps कनेक्शन पर अपग्रेड कर लिया है – प्रयोग करने के समय और डाऊनलोड/अपलोड की कोई सीमा नहीं – हाई स्पीड मामला बढ़िया लगे है! 🙂
On 09, Jan 2009 | 10 Comments | In कतरन | By amit
किसी मूर्ख ने अपनी शादी के विज्ञापन को अख़बार में देते हुए मेरा ईमेल पता छपवा दिया – अब लड़कियों के पिताओं की ईमेलों का तांता लग गया है! #$%&^
On 08, Jan 2009 | 7 Comments | In कतरन | By amit
प्रगति मैदान में फोटो मेला लगा है 8 से 11 तक, बहुत ही गलत टैम पर लगा है। परसों से छह मासिक इम्तिहान हैं, अब पढ़ाई करें कि मेले में जाएँ!! 🙁
बात-२ पर होता हिन्दी का अपमान.....
On 01, Jan 2009 | 12 Comments | In Mindless Rants, फ़ालतू बड़बड़ | By amit
परसों रात्रि कुछ समय मिला तो सोचा कि कुछ ब्लॉगों पर नज़र डाल ली जाए। ठंड थोड़ी बढ़ गई थी तो रजाई छोड़ने का मन नहीं हुआ, इसलिए मोबाईल पर ही नारद खोला और उपलब्ध 150 पोस्ट में देखने लगा कि कहाँ क्या छपा है। 28 तारीख को संपन्न हुए हिन्द युग्म के वार्षिकोत्सव में गए कुछ लोगों ने अपनी आशाओं और निराशाओं को पिरोकर अपने-२ अड्डों पर पोस्ट आदि ठेली तो थोड़ा उनको भी पढ़ा। यह बात सामने आई कि कुछ लोगों को इस बात से बुरा लगा कि सभा में पधारे खास अतिथि बोलते समय बीच-२ में अंग्रेज़ी क्यों बोल रहे थे!!
On 27, Dec 2008 | 6 Comments | In कतरन | By amit
फोन पर एक नए चैट सॉफ्टवेयर को डाल जाँच रहा हूँ। अभी तक तो मामला बढ़िया नज़र आ रहा है, देखते हैं मौजूदा सॉफ्टवेयर से बढ़िया है कि नहीं।
On 18, Dec 2008 | 7 Comments | In कतरन | By amit
केएफ़सी ने अपने ज़िंगकांग बॉक्स के साथ डॉयट पेप्सी देनी आरंभ कर दी है। क्या आएरनी (irony) है!! 😉
