आज आखिरकार संपूर्ण शक्तिरूपा पढ़ डाली। 2 वर्ष पहले दिसंबर 2023 के दिल्ली कॉमिक कॉन में संजय जी से उनके द्वारा प्रकाशित सम्पूर्ण शक्तिरूपा की हस्ताक्षरित प्रति ली थी। इससे पहले यथारूप संस्करण भी लिया था लेकिन पढ़ना हो नहीं पाया था। नया वाला संस्करण भी उस समय ले तो लिया था लेकिन पढ़ना इसको पिछले वर्ष जुलाई में ही शुरू किया था और कोई 20-25 पेज पढ़ रुक जाना पड़ा था। उसके बाद व्यस्तता के कारण आगे पढ़ना नहीं हुआ। अभी कुछ दिन पहले पुनः खोला तो कहानी याद ही नहीं थी। तो इस बार फ़िर से शुरुआत करी लेकिन इस बार 3-4 समय खण्डों में कॉफ़ी की चुस्कियों के साथ इसको पूरा पढ़ लिया।
शक्तिरूपा - अच्छे कांसेप्ट का अनुत्प्रेरित क्रियान्वन
On 28, Dec 2025 | No Comments | In Fiction, कथा | By amit
डर की दुकान
On 24, Dec 2025 | No Comments | In Mindless Rants, फ़ालतू बड़बड़ | By amit
प्रोडक्ट हो या सर्विस – कुछ भी बेचने के कई तरीके, कई नुस्खे होते हैं जो कि इंसान सदियों से अपनाता आ रहा है। लगभग सभी तरीके इमोशन (भावनाओं) पर बिक्री का खेल खेलते हैं – चाहे वह प्रेम हो, लालच हो या फिर डर हो। “डर” के दम पर काफ़ी बिक्री होती है, इसके दम पर काफ़ी काम हो जाते हैं।
दिक्कत तब शुरू होती है जब यह डर “समस्या दिखाने” की बजाय “समस्या गढ़ने” लगता है। यानी आपको कोई असली जोखिम समझाकर समाधान देना नहीं है; बस सामने वाले को यह भरोसा दिला देना है कि बाकी सब ख़तरनाक है और आप अगर हमारे साथ नहीं आए तो… (समझ लीजिए यहाँ नाटकीय संगीत बज रहा है) आपके साथ कुछ बुरा हो जाएगा!!
असीमितताओं के दायरे
On 03, Jul 2025 | No Comments | In Mindless Rants, फ़ालतू बड़बड़ | By amit
असीमित क्या है? कुछ भी असीमित नहीं होता, हर चीज़ की एक सीमा होती है एक दायरा होता है। असीमित तो यह ब्रह्माण्ड भी नहीं है, इसका भी कोई न कोई छोर तो अवश्य है, वह बात अलग है कि अभी हमारी समझ और नज़र से दूर है।
लेकिन हम लोग यह सब जानते बूझते हुए भी मार्केटिंग वालों के “अनलिमिटेड …..” नामक इस नागपाश रुपी झांसे में फंस ही जाते हैं। “अनलिमिटेड” मानों हमारे कानों में कोई आकर्षण में लिप्त संगीत घोल देता है, बाज़ार ने इसे मंत्र बना दिया है और हम सब कुछ जानते बूझते हुए भी इस मंत्र के वशीभूत हो जाते हैं।
कॉमिक कॉन दिल्ली - 2023
On 10, Dec 2023 | One Comment | In Fiction, Here & There, इधर उधर की, कथा | By amit
कल शनिवार को दिल्ली कॉमिक कॉन में जाना हुआ। दिल्ली में कॉमिक कॉन काफ़ी अर्से से लग रहा है लेकिन मेरा इससे पहले जाना हो ही नहीं पाया था, हर बार कुछ न कुछ फच्चर फंस जाता था। बहरहाल इस बार तो तय कर लिया था कि जाना ही जाना है – चाहे एक दिन ही जाएँ लेकिन 3 दिन का सुपरफैन वाला टिकट ले लिया था क्योंकि सुना था उसके साथ मिलने वाले गिफ़्ट बैग में अच्छा सामान होता है। 😁
कॉमिक्स पढ़ना कैसे और कहाँ से शुरू करें?
On 26, Aug 2023 | No Comments | In Fiction, Some Thoughts, कथा, कुछ विचार | By amit
कॉमिक्स की एक अपनी अलग ही दुनिया है और इससे लोग अलग-२ मुकाम पर जुड़ते और बिछुड़ते रहते हैं। कुछ लोग बचपन में शुरुआत करते हैं, कुछ लोग अल्प-वयस्क वर्षों में तो कुछ लोग बाद में भी शुरू करते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बीच में आते-जाते रहते हैं। हर किसी का अपना एक तरीका होता है, मैं यहाँ अपने विचारानुसार इस विषय पर थोड़ा प्रकाश डालूँगा।
ग्रीन लैंटर्न: रहस्यमयी उर्जा की अंगूठी वाला शख़्स
On 04, Aug 2023 | No Comments | In Fiction, Here & There, इधर उधर की, कथा | By amit
क्या आपने कभी सोचा है कि क्या एक अंगूठी आपको ब्रह्माण्ड की रक्षा की शक्ति दे सकती है? क्या एक अंगूठी आपको इतना शक्तिशाली बना सकती है कि आप किसी शक्तिशाली और विशाल सेना से अकेले टक्कर ले सकें?
यदि आप कॉमिक्स पढ़ते हैं या फिर कॉमिक्स से किसी भी तरह जुड़े रहे हैं (फिल्मों, टीवी शो द्वारा अन्यथा कॉमिक बुक्स द्वारा) तो आपने कभी न कभी ग्रीन लैंटर्न के विषय में सुना अथवा पढ़ा ही होगा। अपने कॉमिक्स प्रेम के विषय में तो मैं कई किस्से बांच चुका हूँ, तो आपने यदि वह सब किस्से नहीं पढ़ें हैं तो एक बार वहाँ नज़र-ए-इनायत अवश्य करें, क्या पता आपको अपना बचपन भी याद आ जाए। 😁
किस्सा-ए-कॉमिक्स जारी है.....
On 31, Jul 2023 | 2 Comments | In Fiction, Here & There, Memories, इधर उधर की, कथा, यादें | By amit
पिछली किश्त में जब इंटरवल के बाद की कहानी बाँची तो बताया कि कैसे कॉमिक्स पढ़ना पुनः आरम्भ हुआ और क्या-२ हैरतअंगेज़ नई बातें पता चली। उस समय तक कुछेक ही कॉमिक्स ली गई थी, इंटरवल ख़त्म हुए 3-4 महीने ही हुए थे।
बहरहाल पिछली किश्त से अब तक कोई एक वर्ष बीत गया है और इस दौरान कॉमिक्स के किस्से ने रफ़्तार पकड़ी है। पढ़ी हुई कॉमिक्स के अतिरिक्त पहले न पढ़ी हुई कॉमिक्स काफी मात्रा में ली गई हैं।
किस्सा-ए-कॉमिक्स - इंटरवल के बाद की कहानी
On 20, Jul 2022 | 4 Comments | In Fiction, Here & There, Memories, इधर उधर की, कथा, यादें | By amit
मेरा कॉमिक्स और उपन्यास आदि पढ़ने का शौक बचपन से रहा है। किस्सा-ए-कॉमिक्स एक अरसा पहले बाँचा था। समय के साथ जीवन में और चीज़ों ने उपलब्ध समय पर कब्ज़ा जमा लिया था और 2004-2005 के बाद कॉमिक्स पढ़ना छूटता गया। इस रूचि ने कुछ वर्ष बाद फिर से रफ़्तार पकड़ने की कोशिश की थी लेकिन गाड़ी पटरी पर नहीं आयी।
मेरा बचा हुआ पुराना कॉमिक्स संग्रह
भेड़िया - ए पेंसिल स्केच
On 18, Jul 2022 | 2 Comments | In Art, Here & There, इधर उधर की, कला | By amit
कॉमिक्स पढ़ने का बचपन से शौक रहा है। कॉमिक्स के शौक से सम्बन्थित किस्सा-ए-कॉमिक्स पहले भी बयान किया है। फिर समय के साथ जीवन में और चीज़ों ने उपलब्ध समय पर कब्ज़ा जमा लिया और कॉलेज के बाद धीरे-२ कॉमिक्स पढ़ना छूटता गया और फिर 2009 के आसपास पूरी तरह ही छूट गया।
अब २-३ महीने पहले कीड़ा पुनः कुलबुलाया और कॉमिक्स की ओर रुझान हुआ। २-३ दिन पहले भेड़िया नामक किरदार की एक कहानी का संयुक्त संस्करण मिला तो उसके पृष्ठ भाग पर भेड़िया का एक चित्र बना हुआ मिला। अच्छा लगा तो सोचा कि इसको पेंसिल स्केच के रूप में बना कर देखा जाए। फ़ोन की स्क्रीन पर बनाने में थोड़ी मेहनत लगी पर नतीजा अच्छा निकला।
व्हाटअबाउट-इज़्म क्या होता है?
On 24, May 2019 | 3 Comments | In Here & There, इधर उधर की | By amit
कुछ दिन पहले एक मित्र ने पूछा कि यह व्हाटअबाउट-इज़्म (whatabout-ism) क्या होता है? कुछ विचार के बाद मैंने उसको ऐसे समझाया।
मान लो दो व्यक्ति हैं, एक अनार और एक बीमार।
अनार को बीमार गाली देता है, उसको माँ बहन की गाली देता है, उसके खानदान-पूर्वजों आदि सबका स्तुति गान कर देता है।
ऐसे में अनार पलट के बीमार को असभ्य, कंजर आदि कह देता है।
