अब भई, अल्का ने मुझे टैग कर अपना शिकार बनाया है तो हर्जाने के रूप में मुझे भी उनके विषय “निपुण प्रेमी”(perfect lover) पर अपनी राय व्यक्त करनी है कि मेरे अनुसार मेरी निपुण अथवा अद्वितीय प्रेमिका कैसी हो, अथवा यूँ कहें कि मेरे मन में क्या छवि है एक आदर्श प्रेमिका की। इस खेल के कुछ नियम हैं जो मुझे अल्का द्वारा ही पता चले, और वे हैं:
दोषहीन, निपुण, अद्वितीय प्रेमी!!
On 28, Jan 2006 | 21 Comments | In Mindless Rants, फ़ालतू बड़बड़ | By amit
वो लड़की है कहाँ .....
On 25, Jan 2006 | 7 Comments | In Mindless Rants, फ़ालतू बड़बड़ | By amit
जिसे ढ़ूँढ़ता हूँ मैं हर कहीं, जो मिली थी मुझे एक बार कहीं, जिसके प्यार पर है मुझे यकीन, वो लड़की है कहाँ??
नहीं, यह मैं अपने लिए नहीं कह रहा, इसलिए किसी भ्रम में न पड़ें!! 😉 बात तो यह है कि ऐसा यकीनन सोच रहे होंगे कनाडा के मार्क ला चांस जो गए तो थे क्यूबा में छुट्टियाँ मनाने, पर दिल दे बैठे बेल्जियम की सैबाइन को। साथ साथ घूमते हुए छुट्टियाँ तो समाप्त हो गई पर शर्मीले मार्क सैबाइन का पता या फ़ोन नंबर पूछना भूल गए। अब बेल्जियम की टेलीफ़ोन डायरेक्टरी में दर्ज हर सैबाइन नाम की लड़की को चिठ्ठी लिखने वाले हैं कि ताकि उनकी प्रेमिका उन्हें मिल जाए। (स्रोत)
वोट दो वरना .....
On 25, Jan 2006 | 3 Comments | In Some Thoughts, कुछ विचार | By amit
अमेरिका आखिर अपने को समझता क्या है? कहता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ़ वोट दो वरना भारत-अमेरिका के परमाणु समझौते को नमस्ते कह लो!! (स्रोत) मतलब कि भईये यह तो सीधी सीधी धमकी है, कल को कहेंगे कि फ़लां देश पर हमला करना है, ब्रिटेन की तरह हमारे चमचे बन जाओ वरना तुम्हारी फ़लां स्वीकृति पर रोक लगवा देंगे, या कुछ और कर देंगे!! यानि कि यह तो खुलम-खुला दादागिरी है। साथ ही अमेरिका कहता है कि भारत ने अपने सैन्य और असैन्य परमाणु प्रतिष्ठानों में जो अंतर बताएँ हैं वे विश्वसनीय नहीं हैं।
शेर, जादूगरनी और अलमारी!!
On 25, Jan 2006 | 5 Comments | In Movies, फ़िल्में | By amit
नहीं, न ही मैं पागल हो गया हूँ न ही मैं कोई कहानी नहीं लिख रहा हूँ, अलबत्ता कहानी के बारे में बता अवश्य रहा हूँ!! और कहानी वो जोकि अब फ़िल्म बनकर आ रही है(वैसे तो पिछले दिसम्बर में ही आ चुकी है परन्तु यहाँ भारत में 26 जनवरी को सिनेमा में लग रही है)। मैं बात कर रहा हूँ वाल्ट डिज़नी द्वारा प्रस्तुत, सी.एस.लुईस के लिखे उपन्यास पर बनी फ़िल्म “द क्रानिकल्स आफ़ नारनिया – द लायन, द विच एण्ड द वार्डरोब” की, जो कि एक फ़ैन्टसी फ़िल्म है!!
एक और दिल्ली ब्लॉगर भेंटवार्ता?
On 24, Jan 2006 | 2 Comments | In Mindless Rants, फ़ालतू बड़बड़ | By amit
लगता है कि साकेत की तरह मेरे भी इस महीने मज़े आ रहे हैं, मैं भी इस मास दो ब्लॉगर भेंटवार्ताओं में भाग ले सकूँगा(साकेत जिन दो में भाग लेने वाले थे, वह अब एक हो गईं हैं)। इस रविवार, 29 जनवरी 2006, को संध्याकाल कनॉट प्लेस में एक बार पुनः दिल्ली के कुछ ब्लॉगर बंधुओं का जमावड़ा होगा, और ट्वाईलाईट फ़ेयरी द्वारा मुझे वहाँ आने का निमन्त्रण भी मिला है।
मैजिक आई??
On 23, Jan 2006 | One Comment | In Mindless Rants, फ़ालतू बड़बड़ | By amit
प्रस्तुत है मेरा नवीनतम ब्लॉग, magic-I, भोजन आँख और कान के लिए(दिमाग को कष्ट न दें, उसे थोड़ा आराम करने दें), जो कि एक देसी स्टाईल आडियो वीडियो ब्लॉग है। सुनें देखें और आनंद उठाएँ!! 🙂
वीडियो ब्लॉगिंग .....
On 20, Jan 2006 | 5 Comments | In Some Thoughts, कुछ विचार | By amit
जब से मैंने डिजिटल कैमरा लिया है, मैं उसे प्रयोग करने का अवसर तलाशता रहता हूँ!! और ऐसा हो भी क्यों न, आख़िरकार आधे महीने के वेतन से भी ज्यादा का यह कैमरा आख़िरकार मुझे पड़ा, बुरा हो आलसी-निठल्ले कस्टम अधिकारियों का!!
बहरहाल, आजकल वीडियो ब्लॉगिंग का चलन निकल पड़ा है। इससे पहले आए आडियो ब्लॉग जहाँ ब्लॉगर कुछ लिखने के बजाय एक आडियो फ़ाईल अपने ब्लॉग पर डाल देता था जिसे कि लोग सुन सकें, तो ब्लॉगर के विचार पढ़ने के बजाय दर्शक उन्हे सुन सकते थे। परन्तु यदि ब्लॉगर चाहे तो कुछ लिख भी सकता था, न लिखने का कोई नियम नहीं है!! ठीक ऐसी ही प्रणाली वीडियो ब्लॉगिंग की है, फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि आडियो की जगह ले लेता है वीडियो।
डिजिटल टेक्नॉलोजी से लैस, अत्याधुनिक जेलखाना
On 20, Jan 2006 | No Comments | In Some Thoughts, कुछ विचार | By amit
नीडरलैंड में इस सप्ताह एक नया जेलखाना खुल रहा है जिससे टेक्नॉलोजी की महक आती है। यदि आप अंग्रेज़ी पढ़ सकते हैं, तो इसके बारे में पढ़िए डिजिट ब्लॉग पर!! क्षमा करें परन्तु मेरे पास हिन्दी अनुवाद का समय नहीं है। 🙂
इस अत्याधुनिक जेल के पीछे सोच तो अच्छी है, पर जो प्रणाली/प्रबन्ध जेल में अभी हैं, क्या वे पर्याप्त हैं? मेरे अनुसार तो नहीं हैं, पर यह एक शुरुआत है, एक नया चलन है और मैं पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि यह प्रयोग बहुत आगे तक जाएगा!! 🙂
कलयुग .....
On 16, Jan 2006 | 9 Comments | In Some Thoughts, कुछ विचार | By amit
कलयुग ….. टू हैल एण्ड बैक(अर्थात नर्क से वापसी)
फ़िल्म का शीर्षक तो ज़ोरदार लगा, इसलिए किसी स्टार भूमिका के न होने के बाद भी देख ही ली। है तो लाक्षणिक बॉलीवुड फ़िल्म लेकिन फ़िर भी कथा थोड़ी हट कर लगी। जिन लोगों ने यह नहीं देखी तो उन्हे बता दूँ कि कथा कुछ इस प्रकार है कि हीरो कुनाल खेमू अपनी नई नवेली दुलहन के साथ मधुचंद्र के लिए एक होटल में जाता है जहाँ आशुतोष राणा के कहने पर स्वागत कर्मचारी उन्हे हनीमून सुईट दे देता है जिसमे कैमरे छुपा रखें होते हैं और उनकी सुहागरात की पूरी फ़िल्म उतार ली जाती है। आशुतोष राणा एक दलाल की भूमिका में हैं जोकि एक विदेश में स्थापित देसी अश्लील वेबसाईट के लिए सुहागरात मनाने आए जोड़ों की चुपके से फ़िल्म उतार कर बेचता है। फ़िर वही लोग हीरो और उसकी पत्नी को पुलिस के हाथों पकड़वा देते हैं ताकि उन्हें मुफ़्त की लोकप्रियता मिल सके। अपने हीरो की बीवी आत्महत्या कर लेती है, पर हीरो जेल से जमानत पर छूट जाता है और विदेश में उन लोगों का सर्वनाश करने पहुँच जाता है जिन्होंने उसके जीवन को नर्क बना दिया। जैसा कि अपेक्षित होता है, वो सबकी छुट्टी कर देता है। 😉
इंडिब्लॉगीज़ 2005, परिणाम घोषित!!
On 15, Jan 2006 | One Comment | In Mindless Rants, फ़ालतू बड़बड़ | By amit
कुछ आशंकाओं, उलझनों और एक पुर्नमतदान के बाद आखिरकार इंडिब्लॉगीज़ 2005 के परिणाम देबाशीश ने घोषित कर ही दिए, और जैसी कि उम्मीद थी, अमित वर्मा सर्वश्रेष्ठ भारतीय ब्लॉग की बाज़ी मार ले गए!! 😉 पाकिस्तान में मज़े कर रहे अमित ने अवश्य बटर चिकन और तंदूरी बकरे के साथ इस जीत को मनाया होगा!! 😀 यह विचारणीय तथ्य है कि एक वर्ष पूर्व 2004 में अमित ने इसी ब्लॉग के लिए सर्वश्रेष्ठ नए भारतीय ब्लॉग का पुरस्कार जीता था(इंडिब्लॉगीज़ 2004)।
