पिछले अंक से आगे …..
थोड़ा ऊपर जाकर सोचा कि देखें पुष्कर कैसा लगता है। बात यूं है कि ऊँचाई से किसी भी शहर आदि को देखने का अपना अलग ही मज़ा है। बड़े शहरों में यह मज़ा आप किसी ऊँची इमारत पर चढ़ कर ले सकते हैं, उनकी कोई कमी नहीं होती लेकिन पुष्कर जैसे शहर में, जहाँ कदाचित् ही कोई इमारत चार-पाँच मंज़िला से ऊँची होगी, यह काम किसी पहाड़ी पर चढ़ कर ही किया जा सकता है और ठीक ऐसी ही एक पहाड़ी पर आधा हम लोग चढ़ चुके थे। तो जो नज़ारा हमने देखा वह आप भी देखो!!


