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मूढ़ों की बकर.....

On 15, Jun 2009 | 6 Comments | In Sports, खेल | By amit

विश्व 20-20 मुकाबले में इंगलैंड ने भारत को बाहर का रास्ता दिखाया और इसी के साथ क्रिकेटिया मूढ़ लोगों की बकवास शुरु हो गई….. यानि कि कप्तान धोनी को गालियाँ और हार को धोनी के माथे मढ़ना। रोने वाले रो रहे हैं कि सहवाग को नहीं खिलाया इसलिए हार गए। बेवकूफ़ों को इतनी अक्ल नहीं है कि उसको चोट लगी हुई है इसलिए धोनी ने उसको बाहर बिठाया हुआ है, चोट यदि विकट हो गई तो फिर सहवाग लंबे समय के लिए बाहर हो लेगा। लेकिन मूढ़ लोगों को यह बात समझ नहीं आती, उनकी सुनो तो सहवाग ने अकेले ही मैच जीत लेना था, जैसे सहवाग न हुआ हनुमान का प्रहार हो गया कि जिसको पड़ा उसका बोलोराम हुआ!! सहवाग को लेकर धोनी की जान को रोने वाले कदाचित्‌ पिछले ही महीने समाप्त हुए आईपीएल (IPL) और उसमें सहवाग के जलवों को भूल रहे हैं, कितनी तोप चलाई थी सहवाग ने उसमें कोई बताए ज़रा!! 🙄

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एक किलो दिमाग .....

….. और अक्ल? कदाचित्‌ इतनी कि उसके होने पर ही संदेह हो!! क्या कभी किसी अन्य व्यक्ति के बारे में ऐसी अनुभूति हुई है? हो सकता है आपको न हुई हो पर मुझे कई बार हुई है। दिल्ली मनुष्यों का एक महासागर है, यहाँ हर आकार, प्रकार और विकार के लोग मिलते हैं

उँगली की हड्डी उतर गई थी वह अब काफ़ी ठीक हो गई है, तकरीबन सत्तर प्रतिशत उँगली अब मुड़ जाती है, बाकी भी जल्द ही कुछ दिनों में गर्म पानी की सिकाई और दवा युक्त तेल की मसाज तथा उँगली की एक्सरसाइज़ से ठीक हो जाएगी ऐसा डॉक्टर साहब का कहना है। तो बस आज इसी खुशी में नानी जी के घर के बाहर एक महीने से खड़ी अपनी मोटरसाइकल ली और पेट्रोल डलवाने और एक चक्कर लगा आने की गरज से अपन निकले।

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क्नॉट प्लेस टू चांदनी चौक .....

On 04, Jun 2009 | 10 Comments | In Blogger Meetups | By amit

उधर इलाहाबाद और आसपास के लोग एक के बाद एक ब्लॉगर मीट ठेले जा रहे थे और इधर मैं सोचने में लगा हुआ था कि ऐसा क्या हुआ कि यहाँ दिल्ली में बेतकल्लुफ़ी वाली कॉफ़ी छाप ब्लॉगर मीट बंद हो गईं??!! दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में फौज है ब्लॉगरों की, एक समय था जब दूसरे शहरों के लोग हमसे ईर्ष्या किया करते थे कि हम लोग आए दिन ब्लॉगर चौपाल लगाए चाय-कॉफ़ी सुड़क रहे होते थे और वे लोग सोचते थे कि हम लोग वेल्ले हैं जो इतना टाइमपास किया करते हैं!! कहाँ गई वो ईर्ष्या? अब कोई क्यों नहीं करता? कोई ईर्ष्या करेगा कैसे, सोवियत यूनियन की ही भांति लोगों के पास फालतू टैम खत्म हो गया, जैसे बर्लिन (Berlin) की दीवार गिरी थी वैसे ही ब्लॉगर मीटों की कतार टूट गई!!

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एक अदद कैमरे की चाह.....

सभी लोग हर चीज़ का ज्ञान नहीं रखते, ऑलराऊंडर अति दुर्लभ (या विलुप्त) प्रजाति है, हम जैसे आम जन एक-दो चीज़ों का ही ज्ञान डिटेल में रख पाते हैं।

अभी कुछ दिन पहले एक परिचित बोले कि डिजिटल कैमरा लेने की सोच रहे हैं। अभी तक वे फिल्म वाला कोडेक (Kodak) चला रहे थे, अब डिजिटल होना चाहते हैं, फिल्म में झंझट बहुत है और बारंबार फिल्म डालनी पड़ती है। मुझसे बोले कि यार तुम बड़ा सा औकात वाला कैमरा लिए हुए हो, जानकारी भी रखते हो तो एक कैमरा हमें भी सुझाओ।

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On 31, May 2009 | 7 Comments | In Music, कतरन, संगीत | By amit

न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता।

अस्सी के दशक के अंत में दूरदर्शन पर नसीरूद्दीन शाह का एक धारावाहिक आया था, मिर्ज़ा ग़ालिब, जिसे गुलज़ार साहब ने बनाया था और जगजीत सिंह और चित्रा सिंह ने जिसमें गज़लें गाई थी। पापा के पास इसकी दोनो कैसेट थी (जगजीत सिंह की अन्य सभी एल्बमों की भांति, अभी भी कहीं पड़ी होगी) और जब वे इसको सुना करते तो मुझे इसका सिर्फ़ कवर पसंद आता था, बाकी सब बेकार लगता था, हाल यह था कि मैं जगजीत सिंह को सुन पक गया था, पसंद बिलकुल नहीं था वह गायन लेकिन यह रट गया था कि फलानी गज़ल या गीत फलानी एल्बम में है!! 😉

उस समय इसकी तारीफ़ करने लायक अक्ल नहीं थी, आज एहसास होता है कि यह वाकई सोने जैसी चीज़ है। जगजीत सिंह साहब की आवाज़ और मिर्ज़ा ग़ालिब के लिखे बोल – नशीली चीज़ जिसे सुनकर मज़ा आ जाए। 🙂 रात के इस समय उसी को सुना जा रहा है, आहा, आनंदम!! :tup:

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On 31, May 2009 | 9 Comments | In Blogger Meetups, कतरन | By amit

आज दो ब्लॉगर मीट में शिरकत करी। पहली वाली थी दिल्ली ब्लॉगर मीट जो शाम को क्नॉट प्लेस से शुरु होकर चांदनी चौक स्थित परांठे वाली गली के परांठों पर खत्म हुई। दूसरी हिन्दी ब्लॉगर मीट थी जो रात साढ़े नौ बजे आलोक भाई और चिट्ठाजगत वाले डॉ. विपुल के साथ बरिस्ता की चाय/कॉफी से शुरु होकर बरकोस के थाई खाने पर साढ़े बारह समाप्त हुई!

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एक्सक्लूसिविटी का चक्कर .....

एक मित्र हैं, वो अपनी पसंद के मामलों में ज़रा टची (touchy) हैं, इसलिए जब मौका लगता है तो उनसे मौज ली जाती है। 😉 उनसे मौज लेने का सबसे बढ़िया तरीका ये है कि पहले किसी तरह बात को एप्पल (apple) और उसके किसी उत्पाद पर ले आया जाए तदोपरान्त उसकी बखिया उधेड़ी जाए। ट्राईड एण्ड टैस्टिड (tried & tested) नुस्खा है और काम करने की 99% गारंटी होती है!! 😀 अब अपन फुरसतिया जी जितने काबिल नहीं हैं मौज लेने में लेकिन काम चलाने भर मौज ले ही लेते हैं!! 😉

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अब होंगे नॉकआऊट मुकाबले

On 20, May 2009 | 7 Comments | In Sports, खेल | By amit

अभी दिल्ली डेयरडेविल्स के रॉयल चैलेन्जर्स बंगलोर से हारने के कारण आईपीएल (IPL) में टीमों की हालत अब रोचक हो गई है। सभी टीमों के एक मैच बाकी हैं और सिर्फ़ तीन टीम ऐसी हैं जो चैन की सांस ले सकती हैं। एक दिल्ली डेयरडेविल्स हैं जो चैन की सांस ले सकते हैं फिलहाल क्योंकि सेमी फाइनल में पहुँच चुके हैं और दूसरी ओर कोलकाता नाईट राईडर्स तथा मुम्बई इंडियंस हैं जो इसलिए चैन की सांस ले सकते हैं कि एक बार फिर सेमी फाइनल में जगह बनाने से पहले ही उनकी हवा निकल गई!! 😀 बाकी सभी पाँच टीमों में अभी मारा मारी होनी बाकी है और यकीनन अगले चार मैच नॉकआऊट (knockout) मुकाबले जैसे होंगे।

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